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Saturday, November 5, 2011

भावभीनी श्रधांजलि भूपेन हजारिका जी को

ओ गंगा बहती हो क्यों ............................

  • विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ ..
    नैतिकता नष्ट हुई, मानवता भ्रष्ट हुई, निर्लज्ज भाव से बहती हो क्यूँ. . . .
    इतिहास की पुकार, करे हुंकार, ओ गंगा की धार, निर्बल जन को सबल संग्रामी, समग्रगामी. . बनाती नही हो क्यूँ. . . .
    विस्तार है अपार, प्रजा दोनो पार, करे हाहाकार, निःशब्द सदा, ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम. .. ओ गंगा… बहती हो क्यूँ . ..

    अनपढ़ जन अक्षरहीन अनगिन जन खाद्यविहीन निद्रवीन देख मौन हो क्यूँ ?
    व्यक्ति रहित व्यक्ति केन्द्रित सकल समाज व्यक्तित्व रहित निष्प्राण समाज को छोडती न क्यूँ ?
    रुतस्विनी क्यूँ न रही ? तुम निश्चय चितन नहीं प्राणों में प्रेरणा प्रेरती न क्यूँ ?
    उन्मद अवनी कुरुक्षेत्र बनी गंगे जननी नव भारत में भीष्म रूपी सूत समरजयी जनती नहीं हो क्यूँ ?


एक गम से छुटकारा मिला नहीं एक दूसरे दुःख ने आकर घेर लिया.
इसके पहले जो पोस्ट किया वो भी दुःख भरी खबर थी और अज भी फिर से में भुपने दा के ना रहने कि खबर के साथ दुखी मन से ये पोस्ट कर रही हूँ. बहुत दुःख हो रह है कुछ  दिन के अंतराल पर ही दो कालजयी आवाजो के मालिकों के ना रहने का .आवाजो के मध्यम से यूँ तो वो सदैव हमारे बीच जीवित है किन्तु दुःख इस बात का भी है कि उन आवाजो के अब कोई नयी रचना रचित होकर नहीं गूंजेगी.
भूपेन दा जहाँ भी हो भगवन उनकी आत्मा को शांति दें.
मुझे याद आ रहा है एक उनका अमर गीत.....

ना कहो कोई में अकेला हूँ ...में और मेरा साया दो है दोनों है

बस अभी इतना ही कह पा रही हूँ फिर आउंगी इन दोनो महान कलाकारों के बारे में कुछ बाते कहने .


आभार सखी  

Monday, October 10, 2011

जगजीत सिंह जी को श्रदांजलि


Kya kahe kaise kahe kya kho gya tere jane se
Kaise jiye kaise rahe tanha koi tere jane se



Chhithi na koi sandesh na jaane kaun sa desh jahan tum chale gaye
Is dil ko laga kar tesh jane wo kaun sa desh jahan tum chale gaye.

Jagjit singh ji ke bare mein jab suna nahi rahe tab khabar sunte hi mujhe  jhtka laga jaise kisi ne meri ruh ko mujhse juda kar dia ho…man hua me jor se ro padhu magar safar me thi to aisa karna sahaj na tha.phir kuch pal ankho ke samne se gujarne lage.
Baat un dino ki hai jab mein school me padhti thi ek tv serial aata tha uski shuruaat mein jin shabdoin se hoti thi mere dil tak jate thy shabd kuch aise thye “ neem ke ped se jar jar ke wo jharta hua jal “ isko sunte hi me tv ki tarfa bhagti thin a janaen is aawaj mein wo kaisi kasshis thi .me khud ko rok nahi pati thi…magar umra itni na thi ki smajh patti ki isko kaun ga raha hai. Un dino  itni smajh na thi bas pyar hua is awaj se ..ek do saal bad hi school me ek ladki ne ek gazal gayi (halaki mein un dino gazal aur geet ka matlab nahi janti  thi bas ye pata tha ki slow gana hai ya fast hai…)
gazal thi   ” garaz baras pyasi dharti par phir pani de maula
chidyo ko dana bacho ko guddhani de maula”

is gazal ke shabdo ne bhi mujhe dil tak chuaa meine usase pucha ki kaha mili ye mene suni nahi hai ab tak kis movie ka song hai tab usne bataya ki ye to gazal hai aur jagjit singh ji ne gayi hai. Tab pahli bar mujhe is naan se ba-vasta hone ka mauka mila.
Tab mene jana ki inhone bhaut sari gazalein gayi hai aur wo bahut famus bhi hui hai.
Mene wo gazal likhi apne pass…us ladki se lekar.phir ek din ek class ki frnd ke yahan mujhe “miraaj” naam ki casstte mili iski har gazal mere dil ke kareeb hui aur iske baad hi   
Dheere dheere gazal ko samjha mene jagjit singh kee awaj ko sunte huye aur phir gazal ka jo ye shuak laga usne mujhe shayri ki  kitaboin  tak pahunchya aur gazal ke baaare mein mene apni jankari ko kuch aur badhya. Padhayii aur shayri ka shuak sath sath chalet rahe.likhti bachapan se hi thi haa pahle kavita likhi thi ba jinhone gazlo ka roop akhtiyaat kar lia tha.
Har  sukh dukh ke mausam mein jitna sath jagjit ji ka raha aur kisi ka nahi raha.jab khud ko akela paya tab unki awaj ko apna hamsafar paya. Subha uthne ke sath gazalein bajana shuru aur rat ko rote watq bhi gazale sunte sunte na jane kab me so jati thi pata hi nahi chalta tha.aksar dant bhi khayi ki kya rote huye gane sunti rahti hai kuch acha kyo nahi sunati par mere upar bas ek hi awaaj asar karti thi aur wo aaj khamosh ho gayi .
“sdama to hai mujhe bhi tujhse juda hu mein
Lekin ye sochata hu ab tera kya hu mein”

Jagjit singh ek aisa naam hai jisko sunkar dekhkar mera dil pahli bar dhadka aur bola ki mujhe inse shadi karni hai umra choti thi par samjh shayad gazale sunke badi hone lagi thi ya me gazlo ke mayne achi tarah kuch hi waqt mein samjhne lagi thi.  Jab nind khle jagjit singh ji ki awaj aur jab sone ka dil na ho to jagjit singh ji ki awaj sulane ko teyar thi mujhe......
क्रमशः

Thursday, June 30, 2011

सुशिक्षित समाज

मेरे प्रिय दोस्तों
आज एक लंबे अंतराल के बाद में आप सभी के समक्ष एक अपना लेख लेकर हाज़िर हूँ. आज कल पढाई से जुडी हू तो उसी को लेकर कुछ लिखा है मैंने..शायद आप लोगों को अच्छा  लगे...आपकी राय से जरुर वाकिफ करना मुझे

आभार
सखी सिंह

      सुशिक्षित समाज 


शिक्षा का व्यक्ति के जीवन में विशेष महत्व है. व्यक्ति समाज का आवश्यक घटक है अतः ऐसे में समाज के लिए भी शिक्षा का महत्वपूर्ण होना स्वाभाविक है.सभ्य समाज की अवधारणा, विकास तथा निरंतरता बिना शिक्षा के संभव प्रतीत नहीं होती तथा ज्ञान प्राप्त करने का समुचित साधन शिक्षा है. किन्तु यह भी सत्य है कि शिक्षा ही ज्ञान प्राप्ति का एक मात्र साधन नहीं है. फिर भी शिक्षा प्राप्त करने पर ज्ञान प्राप्त करने के अनेक रास्ते खुद बा खुद खुल जाते है.ऐसे भी साक्षरता दर के शत-प्रतिशत लक्ष्य को विश्व समुदाय अभी तक प्राप्त नहीं कर सका है.इसके लिए वैश्विक संस्थाए यूनेस्को, यूनिसेफ इत्यादि लगातार प्रयास कर रही हैं . इन प्रयासों के कारण ही तीसरी दुनियां के देशों में साक्षरता कि दर में काफी सुधार देखा जा रहा है.लेकिन दुर्भाग्यवश दुनियां के बहुत से लोग अभी भी शिक्षा से वंचित हैं, विशेषकर तीसरी दुनियां की आबादी का लगभग आधा भाग आज भी अशिक्षित है .अब जब आधे लोग साक्षर ही नही होंगे तो ऐसी दशा में समाज में उत्पन्न होने वाली समस्याओं की संख्या स्वाभाविक रूप से अधिक होगी एवं इन समस्याओं का निराकरण भी अपने आप में कठिन होगा. अतः इन समस्याओं के निराकरण हेतु समाज का सुशिक्षित होना अति आवश्यक है. इसलिए शिक्षा का प्रसार आज की प्रमुख आवश्यकता है.इस आवश्यकता की पूर्ती के लिए समाज आज पहले से अधिक जागरूक हो रहा है, हर व्यक्ति सतर्क हो रहा है एवं देश-प्रदेश की सरकारे भी इस दिशा में सकारात्मक प्रयास कर रही हैं. फलस्वरूप देश में साक्षर लोगों की   प्रतिशतता में पिछले एक दशक में आशातीत वृद्धि हुई है. सुशिक्षित समाज के लिए शिक्षा के उद्देश्य निम्न हैं –
११.      सहयोग तथा सदभावना का विकास करना
२२.      शारीरिक व मानसिक विकास करना
३३.     नैतिक एवं चारित्रिक विकास करना
४४. सांस्कृतिक समझ पैदा करना
५५. नागरिकता के गुणों का विकास करना
 ६. स्वस्थ्य एवं संतुलित जीवन व्यतीत करने का ज्ञान प्राप्त करना   इत्यादि .
एक सुशिक्षित समाज के निर्माण हेतु ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम २००९ ‘ मौलिक अधिकारों की सूची  में शामिल हो गया है ताकि देश का प्रत्येक बच्चा ६ से १४ आयु वर्ग का, अनिवार्य रूप से निशुल्क प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर सके. अब सरकार माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा निशुल्क करने का प्रयास करने में लगी हुई है जिससे सभी बच्चे शिक्षित हो और आगे चलकर एक सभ्य, सुशिक्षित समाज का निर्माण करने में अपना सहयोग प्रदान कर सके .  


Sunday, May 8, 2011

माँ

मां, इस एक शब्द को सुनने के लिए नारी अपने समस्त अस्तित्व को दांव पर


लगाने को तैयार हो जाती है। नारी अपनी संतान को एक बार जन्म देती है।

लेकिन सच तो यह है कि बच्चे के बड़े होने तक अलग-अलग रूपों में खुद उसका

पुनर्जन्म होता है। यानी एक शिशु के जन्म के साथ ही स्त्री के कई खूबसूरत

रूपों में लगातार अभिव्यक्त होती है।





माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक दिवस नहीं एक सदी भ‍ी कम

है। किसी ने कहा है ना कि सारे सागर की स्याही बना ली जाए और सारी धरती

को कागज मान कर लिखा जाए तब भी मां की महिमा नहीं लिखी जा सकती। इसीलिए

हर बच्चा कहता है मेरी मां सबसे अच्छी है। जबकि मां, इसकी- उसकी नहीं हर

किसी की अच्छी ही होती है, क्योंकि वह मां होती है। मातृ दिवस पर हर मां

को उसके अनूठे अनमोल मातृ-बोध की बध





मां, कितना मीठा, कितना अपना, कितना गहरा और कितना खूबसूरत शब्द है।

समूची पृथ्वी पर बस यही एक पावन रिश्ता है जिसमें कोई कपट नहीं होता। कोई

प्रदूषण नहीं होता। इस एक रिश्ते में निहित है छलछलाता ममता का सागर।

शीतल और सुगंधित बयार का कोमल अहसास। इस रिश्‍ते की गुदगुदाती गोद में

ऐसी अव्यक्त अनुभूति छुपी है जैसे हरी, ठंडी व कोमल दूब



माँ जब भी रोती थी जब बेटा खाना नहीं खाता था, और माँ आज भी रोती है जब

बेटा खाना नहीं देता,





HAPPY MOTHER DAY

इस मेसेज को इतना फॉरवर्ड करो के कभी कोई माँ भूखी न सोये

(not mine)

Monday, October 25, 2010

करवा-चौथ .... Karva Chauth


‘करवा चौथ’ के व्रत से तो हर भारतीय अच्छी तरह से परिचित है! यह व्रत महिलाओं के लिए बहुत अहम होता है क्यों कि ये व्रत सुहागिन महिलाये अपने सुहाग कि रक्षा के लिए रखती है. करवा चौथ भारत में मुख्यत: उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में मनाया जाता है। इस पर्व पर विवाहित औरतें अपने पति की लम्बी उम्र के लिये पूरे दिन का व्रत रखती हैं और शाम को चांद देखकर पति के हाथ से जल पीकर व्रत समाप्त करती हैं। इस दिन भगवान शिव, पार्वती जी, गणेश जी, कार्तिकेय जी और चांद की पूजा की जाती हैं।
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को महिलाये करवा चौथ का व्रत बड़ी जोर शोर से मानती है. इस व्रत में सुहागिन महिलाएं करवा रूपी वस्तु या कुल्हड़ अपने सास-ससुर या अन्य स्त्रियों से बदलती हैं। विवाहित महिलाएं पति की सुख-समपन्नता की कामना हेतु गणेश, शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। सूर्योदय से पूर्व तड़के ‘सरघी’ खाकर सारा दिन निर्जल व्रत किया जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार व्रत का फल तभी मिलता है जब यह व्रत करने वाली महिला भूलवश भी झूठ, कपट, निंदा एवँ अभिमान न करे। सुहागन महिलाओं को चाहिए कि इस दिन सुहाग-जोड़ा पहनें, शिव द्वारा पार्वती को सुनाई गई कथा पढ़े या सुनें तथा रात्रि में चाँद निकलने पर चन्द्रमा को देखकर अर्घ्य दें, उसके बाद भोजन करें।

करवा-चौथ व्रत कथा
एक समय की बात है। पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले गए। किंही कारणों से वे वहीं रूक गये। उधर पांडवों पर गहन संकट आ पड़ा। शोकाकुल, चिंतित द्रौपदी ने श्रीकृष्ण का ध्यान किया। भगवान के दर्शन होने पर अपने कष्टों के निवारण हेतु उपाय पूछा। कृष्ण बोले- हे द्रौपदी! तुम्हारी चिंता एवं संकट का कारण मैं जानता हूँ, उसके लिए तुम्हें एक उपाय बताता हूँ। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी आने वाली है, उस दिन तुम करवा चौथ का व्रत रखना। शिव गणेश एवं पार्वती की उपासना करना, सब ठीक हो जाएगा। द्रोपदी ने वैसा ही किया। उसे शीघ्र ही अपने पति के दर्शन हुए और उसकी सब चिंताएं दूर हो गईं। कृष्ण ने दौपदी को इस कथा का उल्लेख किया था:
भगवती पार्वती द्वारा पति की दीर्घायु एवं सुख-संपत्ति की कामना हेतु उत्तम विधि पूछने पर भगवान शिव ने पार्वती से ‘करवा चौथ’ का व्रत रखने के लिए जो कथा सुनाई, वह इस प्रकार है –
एक समय की बात है कि एक करवा नाम की पतिव्रता धोबिन स्त्री अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी के किनारे के गाँव में रहती थी। उसका पति बूढ़ा और निर्बल था। करवा का पति एक दिन नदी के किनारे कपड़े धो रहा था कि अचानक एक मगरमच्छ उसका पाँव अपने दाँतों में दबाकर उसे यमलोक की ओर ले जाने लगा। वृद्ध पति से कुछ नहीं बन पड़ा तो वह करवा...करवा.... कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा।
अपने पति की पुकार सुन जब करवा वहां पहुंची तो मगरमच्छ उसके पति को यमलोक पहुँचाने ही वाला था। करवा ने मगर को कच्चे धागे से बाँध दिया। मगरमच्छ को बाँधकर यमराज के यहाँ पहुँची और यमराज से अपने पति की रक्षा व मगरमच्छ को उसकी धृष्टता का दंड देने का आग्रह करने लगी- हे भगवन्! मगरमच्छ ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगरमच्छ को उसके अपराध के दंड-स्वरूप आप अपने बल से नरक में भेज दें।
यमराज करवा की व्यथा सुनकर बोले- अभी मगर की आयु शेष है, अतः मैं उसे यमलोक नहीं पहुँचा सकता। इस पर करवा बोली, "अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूँगी।" उसका साहस देखकर यमराज डर गए और उस पतिव्रता करवा के साथ आकर मगरमच्छ को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु दी। यमराज करवा की पति-भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और उसे वरदान दिया कि आज से जो भी स्त्री कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को व्रत रखेगी उसके पति की मैं स्वयं रक्षा करूंगा। उसी दिन से करवा-चौथ के व्रत का प्रचलन हुआ। 
आज के परिवेश में करवा चौथ :-
आज कल पत्नियों के साथ साथ पति भी इस व्रत को रखते है..वो भी सारा दिन भूंखे रह कर अपनी पत्नियों का साथ देते है. अपनी पत्नियों की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत करने में सिर्फ युवा पीढ़ी ही शामिल नहीं है, बल्कि कई ऐसे प्रौढ़ पुरुष भी शामिल हैं जो लंबे समय से अपनी पत्नियों की लंबी उम्र के लिए व्रत कर रहे हैं।
इसदिन पत्निया सोलह श्रींगार करके अपने पति कि आरती करती है और चंद के दर्शन के साथ पति का दर्शन कर अपने व्रत को खोलती है. इस व्रत में मेहँदी लगाकर महिलाये अपने श्रींगार को पूरा करती है. आज कल मार्केट में मेहंदी लगाने वालो कि भरमार होने के बावजूद इस व्रत एक समय लंबी लंबी कतारे लगा कर महिलाओ को मेहंदी लगवाने के लिए इंतज़ार करना पड़ता है.
इस दिन का महिलाये बड़े उत्साह से इंतज़ार करती है . क्यों कि वो इस दिन अपने पतिके लिए सबसे सुंदर स्त्री बनने में कोई कसार बाकि नहीं रखती .पति अपनी पत्नियों को उपहार भी देते है. इस तरह ये व्रत पति और पत्नी को एक दूसरे के करीब लाता है और एक सुखद खुशहाल जीवन का रास्ता दिखाता है.


Sunday, October 24, 2010

“फाग करे अनुराग “

फाग करे अनुरागये बात तो आप सभी ने सुनी ही होगी ...
आज कल फाग का मौसम है और अनुराग मतलब प्यार ये प्यार का भी मौसम है .
तो फाग अर्थात फाल्गुन और अनुराग मतलब प्यार एक दूसरे के पूरक है .
प्यार और फाल्गुन का हमारे हिन्दुस्थान मैं प्राचीन कल से ही सम्बन्ध रहा है.

कृष्ण और राधा ..बरसाने कि होली को अमर कर गए अपने प्यार भरे होली खेलने के अंदाज़ से.कृष्ण और राधा इस फाग के महीने में रंगों में डूब कर अपने प्रेम मैं सरोबार हो कर हर तरफ प्रेम कि बारिश करते थे ..वही बारिश इस फाल्गुन में आज भी होती है.

ये महीना हर तरफ बहुत प्यार भरा और रंग बिरंगा होता है .चाहे होली के रंग हो या प्यार के रंग हो या फिर प्रकृति द्वारा बिखेरे गए मन मोहने वाले फूलो के द्वारा बिखेरे गये रंग हो . बस इस रंगीन प्यार भरे माहौल में कौन सा इंसान नाच नहीं उठेगा .

द्वापर युग में कृष्ण और राधा ने जो फाल्गुन में प्यार का रंग भरा अब भी सबके ऊपर चढा है और हम सब को ये महीना अवश्य कृष्ण और राधा के सच्चे प्यार का महत्व बताता है.

होली के मौसम में हर दिशा में फूलो के रंग बिखर जाने से प्रकृति कि सुंदरता देखते ही बनती है. इसी भाव को लेकर कुछ कहना चाहूंगी .............


निखरी प्रकृति का देखो हुआ धरा पर राज
मन ये मेरा बावरा फिर हुआ महक से आज


खिली खिली सी रंगत के संग महकी क्यारी क्यारी
स्वपन लोक सी छटा यहाँ बिखरी देखी न्यारी


रंग बिरंगे फूल खिले है छाई है हरियाली
मुंह से लगा रहे एक रस से भरी प्याली

आनन्दित तन चहका सा मन झूम रहा है ऐसे
मीठा एक हवा का झोंका चूम रहा है जैसे


इतना प्यारा दृश्य जो सारा आँखों में बस जाए
मध्यम -2 मन से खुशबू महकी -2 आये


सपना एक सुहाना अपने मन में आज बसाऊ
रंग बिरंगे पंख लगा कर फूलो को छू आऊ


आप सभी पाठकों को मेरी तरफ से होली कि हार्दिक शुभकामनाये

Monday, October 4, 2010

माँ-बाप




आज अचानक एक विज्ञापन देखा टीवी पर...एक बेटी घर से बाहर  काम से जाती है , माँ की आँखों में बेटी की जुदाई के कारन आंसू आ जाते है और वो उन आंसूओं को रुमाल से पोछती है. और जाते जाते बेटी माँ के हाथ से वो रुमाल लेकर जाती है .

फिर विज्ञापन के आगे का भाग दिखाया जाता है  और वो लड़की एक प्रतियोगिता में विजेता बन जाती  है  क्यों कि उसके दिमाग में अपनी माँ के वो आंसू समाये थे..और जिस रूमाल में  माँ के आंसू समाये थे वो  उसको माँ के आंसूओं कि याद दिला रहा था..फिर वो जीत जाती है और हवा में लहरा  देती है वो माँ के हाथ से लिया गया माँ के आंसूओ से भीगा वो रुमाल.
कुल मिला कर पूरा विज्ञापन ज्यादा से ज्यादा लगभग १ मिनट का होगा  ..पर मन में कही गहरे उतर गया वो एक विज्ञापन.
ऐसा क्या था उसमें ? बहुत से ऐसे ही विज्ञापन आते रहते हैं , है न ?

उस विज्ञापन में मुझे तो एक खास बात नज़र आयी..एक अहसास , एक अपनापन , एक जरिया मंजिल तक जाने का...और सबसे ज्यादा जो चीज़ खास थी,  वो था माँ बेटी का प्यार और माँ के लिए बेटी के अहसास ..जिसके कारन माँ के आंसू बेटी के लिए एक प्रेरणा बन गए और मंजिल तक जाने का रास्ता वही से उसे दिख गया..उसने अपनी मंजिल पाने के लिए जान लगा दी. है न  ये  एक खूबसूरत अहसास भरा विज्ञापन.

आज जब रिश्तों के मायने बदल रहे है ..बच्चे माँ बाप से दूर रहने  को मजबूर है या शादी के बाद एक अलग घर बना कर बस जाते है, ऐसा चलन अब आम बन गया है .
ऐसे में ये विज्ञापन एक सुखद अहसास भर देता है मन में.
जब माँ बाप को छोड़ कर बेटी अपने घर चली जाती है और बेटा बहू के साथ अपना घर बसा लेता है तब माँ बाप कैसे अकेले में अपने दिन बिताते है और कितने आंसू बहते है ये गिन पाना बहुत मुश्किल है .पर काश अगर हर बच्चा अपने माता- पिता के दर्द का ख्याल करे ,तो जब तक बहुत जरूरी न हो वो माता पिता से दूर  नहीं रह सकता.
ये बात हर बच्चे को समझनी चाहिए कि माँ-बाप बच्चे के सिर पर  छत है ..ये छत जब तक सिर पर रहे तब तक कोई धूप हमें नहीं  जला सकती है..बल्कि एक शीतलता भरी छाया जरुर हमारे ऊपर   बनी रहती है.

मैं तो ये ही चाहती हूँ हर बेटा या बेटी अपने माँ-बाप कि अहमियत समझे और जब तक हो सके उनका साथ दे उनके साथ रहे. फिर जो जगह जगह ओल्ड एज होम खुल रहे है उनकी जरुरत नहीं होगी हमारे समाज में. जिन्होंने हमें बनाया होता है क्या हम उनको अनके आखिरी वक्त में अपना साथ भी नहीं सकते है?  फिर क्यों कोई माँ-बाप एक बच्चे को पाले या उस पर अपनी जिंदगी लुटाए भला??

हो सकता है बहुत से लोग इस बात के लिए भी बहुत से तर्क  देने लग जाये..पर कुछ बातों के लिए तर्क ना ही दिए जाए तो अच्छा है.
बस हर माँ-बाप को अंतिम वक्त तक अपने बच्चो का साथ मिले और प्यार  मिले तब देखो दुनिया कितनी हसीं होगी.

बस प्यार के अलावा इनको कोई चाहत नहीं होती
माँ-बाप से बड़ी दुनिया में  कोई दौलत नहीं होती  
                    .        .११.२९ पम , ४/१०/१०