ताज़ा प्रविष्ठिया :


विजेट आपके ब्लॉग पर

Monday, October 4, 2010

माँ-बाप




आज अचानक एक विज्ञापन देखा टीवी पर...एक बेटी घर से बाहर  काम से जाती है , माँ की आँखों में बेटी की जुदाई के कारन आंसू आ जाते है और वो उन आंसूओं को रुमाल से पोछती है. और जाते जाते बेटी माँ के हाथ से वो रुमाल लेकर जाती है .

फिर विज्ञापन के आगे का भाग दिखाया जाता है  और वो लड़की एक प्रतियोगिता में विजेता बन जाती  है  क्यों कि उसके दिमाग में अपनी माँ के वो आंसू समाये थे..और जिस रूमाल में  माँ के आंसू समाये थे वो  उसको माँ के आंसूओं कि याद दिला रहा था..फिर वो जीत जाती है और हवा में लहरा  देती है वो माँ के हाथ से लिया गया माँ के आंसूओ से भीगा वो रुमाल.
कुल मिला कर पूरा विज्ञापन ज्यादा से ज्यादा लगभग १ मिनट का होगा  ..पर मन में कही गहरे उतर गया वो एक विज्ञापन.
ऐसा क्या था उसमें ? बहुत से ऐसे ही विज्ञापन आते रहते हैं , है न ?

उस विज्ञापन में मुझे तो एक खास बात नज़र आयी..एक अहसास , एक अपनापन , एक जरिया मंजिल तक जाने का...और सबसे ज्यादा जो चीज़ खास थी,  वो था माँ बेटी का प्यार और माँ के लिए बेटी के अहसास ..जिसके कारन माँ के आंसू बेटी के लिए एक प्रेरणा बन गए और मंजिल तक जाने का रास्ता वही से उसे दिख गया..उसने अपनी मंजिल पाने के लिए जान लगा दी. है न  ये  एक खूबसूरत अहसास भरा विज्ञापन.

आज जब रिश्तों के मायने बदल रहे है ..बच्चे माँ बाप से दूर रहने  को मजबूर है या शादी के बाद एक अलग घर बना कर बस जाते है, ऐसा चलन अब आम बन गया है .
ऐसे में ये विज्ञापन एक सुखद अहसास भर देता है मन में.
जब माँ बाप को छोड़ कर बेटी अपने घर चली जाती है और बेटा बहू के साथ अपना घर बसा लेता है तब माँ बाप कैसे अकेले में अपने दिन बिताते है और कितने आंसू बहते है ये गिन पाना बहुत मुश्किल है .पर काश अगर हर बच्चा अपने माता- पिता के दर्द का ख्याल करे ,तो जब तक बहुत जरूरी न हो वो माता पिता से दूर  नहीं रह सकता.
ये बात हर बच्चे को समझनी चाहिए कि माँ-बाप बच्चे के सिर पर  छत है ..ये छत जब तक सिर पर रहे तब तक कोई धूप हमें नहीं  जला सकती है..बल्कि एक शीतलता भरी छाया जरुर हमारे ऊपर   बनी रहती है.

मैं तो ये ही चाहती हूँ हर बेटा या बेटी अपने माँ-बाप कि अहमियत समझे और जब तक हो सके उनका साथ दे उनके साथ रहे. फिर जो जगह जगह ओल्ड एज होम खुल रहे है उनकी जरुरत नहीं होगी हमारे समाज में. जिन्होंने हमें बनाया होता है क्या हम उनको अनके आखिरी वक्त में अपना साथ भी नहीं सकते है?  फिर क्यों कोई माँ-बाप एक बच्चे को पाले या उस पर अपनी जिंदगी लुटाए भला??

हो सकता है बहुत से लोग इस बात के लिए भी बहुत से तर्क  देने लग जाये..पर कुछ बातों के लिए तर्क ना ही दिए जाए तो अच्छा है.
बस हर माँ-बाप को अंतिम वक्त तक अपने बच्चो का साथ मिले और प्यार  मिले तब देखो दुनिया कितनी हसीं होगी.

बस प्यार के अलावा इनको कोई चाहत नहीं होती
माँ-बाप से बड़ी दुनिया में  कोई दौलत नहीं होती  
                    .        .११.२९ पम , ४/१०/१०

 

19 comments:

मनोज कुमार said...

अच्छी प्रस्तुति।

मनोज कुमार said...

बहुत सही कहा आपने। मां बाप से बढकर कोई दौलत नहीं होती। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
योगदान!, सत्येन्द्र झा की लघुकथा, “मनोज” पर, पढिए!

arun c roy said...

सखी जी सच कहा है आपने.. माँ बाप से बढ़कर कोई और नहीं.. हमारी भावनओं को उनसे बेहतर कोई समझ नहीं सकता... बहुत भावपूर्ण आलेख लिखा है आपने ..

निर्झर'नीर said...

bahut sarthak lekh


मां बाप से बढकर कोई दौलत नहीं होती

Indian The Great people said...

Bhavuk Magar sach ......

दिग्गज दवे said...

प्रिय सखी

बहुत ही सुन्दरता से अपने विचार रखे है जो इंसान को भावुक कर जाये

ये दौलत नसीब वालो को ही मिलती है...माँ बाप को शाश्त्रो में भी भगवान का दर्ज़ा दिया गया
ऊपर वाले को भले ही भूल जाये लेकिन अगर जो इनकी पूजा करे वो परम सुख को पाता है
जो इस मर्म को समझ गया समझो वो तर गया

सुनील गज्जाणी said...

sakhi jee
namaskar !
achcha vishay hai ,
thanks

तिलक राज कपूर said...

संबंध का मुख्‍य आधार होता है परस्‍पर अनुभूति। कभी-कभी यह अनुभूति वास्‍तविकता से विपरीत भी होती है। लेकिन अगर हम प्राकृतिक नियम को ध्‍यान रखें यह समझा जा सकता है कि सामान्‍य मॉं-बाप बच्‍चे में ही अपना भूत-वर्तमान-भविष्‍य देखते हैं। वो बच्‍चे सौभाग्‍यशाली हैं जो यह समझते हैं।

रश्मि प्रभा... said...

ehsaason ko tark me nahi rakha jaa sakta... log , tarkik samajhte hain khud ko, per ye nahi jante ki tark pyaar ke aage nahi hota

sakhi with feelings said...

मनोज जी ,अरुण जी, नीर जी एवं ग्रेट इंडियन जी बहुत बहुत शुक्रिया

sakhi with feelings said...

प्रिय दिग्गज
अपने सही कहा माँ बाप कि पूजा करके सभी सुखो को पाया जा सकता है

sakhi with feelings said...

सुनील जी बहुत बहुत शुक्रिया
...........................
तिलक राज कपूर जी

अपने सही कहा जो बच्चे माँ बाप कि अहमियत जानते वो सौभाग्य शाली होते है .

शुक्रिया आपका
...............

रश्मि जी
सही कहा प्यार में कोई तरह नहीं चलता

शुक्रिया

Sharma ,Amit said...

"पर कुछ बातों में तर्क न दिए जाए तो ही अच्छा है !!!" वाकई यह बात एक दम सटीक है ...

Mukesh Kumar Sinha said...

ek achchha post.........

lekin sach kahun Sakhi jee........ye advsertisment to sach me sirf ham jaise aam aadmi ke emotional baaton ko catch kar ke cash karne ka sadhan ho gaya hai.........:)

lekin main waise aapke baato se ittefaak rakhta hoon!!

god bless!!
ab follow kar raha hoon, barabar aaunga...:)

mahendra verma said...

ण्क विज्ञापन में आपने कितना बड़ा जीवन दर्शन खोज लिया...आपकी चिंतनशीलता को प्रणाम। बहुत ही उपयोगी और प्रेरणादायक आलेख...आभार।

Udan Tashtari said...

वाकई, मां बाप से बढकर कोई दौलत नहीं होती..

सार्थक आलेख एवं उम्दा संदेश!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सच है कभी कभी कोई विज्ञापन मन में उतर जाते हैं ...लेकिन विज्ञापन या उस दृश्य को देखने और महसूस करने की क्षमता होनी चाहिए ...बहुत अच्छेसे वर्णित किया विज्ञापन ..और उससे जुडी अपने मन की बात को भी ...जो माँ -बाप की सेवा करते हैं उनको दुनिया की सबसे बड़ी दौलत हासिल रहती है ..

SURINDER RATTI said...

Sakhi Ji,

Namaste,
Mata Pita ki seva shayad bhavishya mein kitabon ke panno tak hi simit rahengi. Har vyakti apne swarth laabh hetu kaarya kar raha hai, Agar Pita Ji ke paas dhan hai to unki seva sab karenge Maa ki seva karenge, paisa aisi chumbak hai akarshan hai woh saare bhed mita deta hai. Nishkamta ki kami hai bas.
Surinder Ratti
Mumbai

sumant said...

बहुत सही कहा आपने माँ बाप से बढ़कर कोई और नहीं.